If someone really want to know about charcoal drawing please visit this link. I have never seen such a beautiful lively sketches, it makes you wish you could draw like this.
(This horse sketch, I made with 6B pencil.)
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(This horse sketch, I made with 6B pencil.)
बंजारा मन है ये पागल हवा की तरह
इसमें आवारापन है हवा की तरह
इसको रोको नहीं इसको टोको नहीं
जाने दो इसको चाहे जहाँ ये वहां।
नाचे लहरों पे ये डूबे मंझधार में
बादलों की तरह उड़े आकाश में
इसको रोको नहीं…………..।
कोई सीमा नहीं कोई बंधन नहीं
कभी इस देश में कभी उस देश में
इसको रोको नहीं……………।
बंजारा मन है ये पागल हवा की तरह
इसमें आवारापन है हवा की तरह
इसको रोको नहीं इसको टोको नहीं
जाने दो जाना चाहे जहाँ ये वहां।
क्या क्या हमने खोया होता, जो हम कभी ना मिलते
यादों के जो फूल खिले हैं वो फिर कभी न खिलते
कितनी खुशियाँ बांटी हमने दुःख भी साथ सहे हैं
कितने तनहा रह जाते जो तुम न हमको मिलते
जितना जाना,जितना समझा वो क्या कम था वरना
तुम्हें समझ पाने की हसरत दिल में ले कर मरते
वो तो किस्मत अच्छी थी जो तुमसे दोस्त मिले हैं
वरना तुमसे दोस्त बड़ी किस्मत वालों को मिलते
(
mere apne,jo mere dost bhi hain unke naam hai yeh kavita)
ना मुझसे करो चाँद तारों की बातें ,ना महलों ना मह्गीं सौगातों की बातें,
साथ कब तक रहेगा इतना बतादो, प्यार कब तक रहेगा बस इतना बतादो
इबादत नहीं चाहिए मुझको तेरी, पलकों पर बिठा कर भी ना तुम मुझको रखना,
साथ कब तक रहेगा इतना बतादो, प्यार कब तक रहेगा बस इतना बतादो|
राह दुश्वार हो फेर मुंह तुम ना लोगे ,आंधी तूफां में हाथ थामे रहोगे
साथ मुश्किल में दोगे इतना बतादो, प्यार कब तक रहेगा बस इतना बतादो।
ज़ुल्फ़ ज़र होगी इकदिन तुम्हे तो पता है,जवानी ढलेगी तुम्हे तो पता है,
साथ मरने तक दोगे इतना बतादो, प्यार कब तक रहेगा बस इतना बतादो।
एक देश में थे तीन शहर दो उजड़े उजड़े , एक बसा ही नहीं
जो बसा ही नहींउसमें थे तीन मकान
दो टूटे फूटे एक की छत ही नहीं
जिसकी छत ही नहीं उसमें रहते थे तीन दोस्त
दो अंधे बहरे एक के हाथ पाँव ही नहीं
जिसके हाथ पाँव ही नहीं उसकी थी तीन बीबियाँ
दो भाग गयीं एक पास रहती ही नहीं
जो पास रहती ही नहीं उसके थे तीन बेटे
दो अनपढ़ रह गए एक लिखना जानता ही नहीं
जो लिखना जानता नहीं नहीं उसने लिखे तीन उपन्यास
दो आधे अधूरे रह गए एक का अदि अंत ही नहीं
जिसका अदि अंत ही नहीं उसे मिले तीन पुरस्कार
दो गुमनाम एक का नाम पता ही नहीं|
‘कहते हैं झूट के पाँव नहीं होते.’
(बचपन में एक कविता पड़ी थी ‘एक झूठ’ अब कविता तो याद नहीं रही पर उस शीर्षक से अनुप्रेरित हो कर इस कविता का जन्म हुआ.)
I tried to translate this poem in English through Google translator, the result was horrible, hence this warning- cum-request, please don’t even try this.( you can do this but at your personal risk, I am not to be blamed.)
प्रेम क्या है मुझे पता नहींप्रेम क्या नहीं है वो बताती हूँ |
प्यार रास नहीं,रंग रोमांस नहीं
मन में पल भर को उठा
कोई खुमार नहीं|
प्यार सौदा नहीं,कोई व्यापर नहीं
तू ना दे तो में ना दूं
ऐसा कारोबार नहीं|
सृष्टि बस मेरी,किसीऔर का अधिकार नहीं
जब हो सोच ऐसी
फिर तो वहां प्यार नहीं|
प्यार अकृतज्ञता नहीं
इर्ष्या और स्वार्थ नहीं
कटुता और हिंसा से
इसको सरोकार नहीं|
इसके बाद जो भी बचे वोही तो प्यार है
तुम स्वयं प्यार हो बाकि सब बेकार है|