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Tag Archives: hindi kavita

Safar/ सफ़र

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सफ़र

मंजिल तो हर कोई देखो एक ना एक दिन पायेगा

कैसे बीता था सफ़र याद ये रह जायेगा
कौन था सफ़र में साथ,कौन साथ छोड़ गया
बना कौन सफ़र में सीढ़ी कौन हाथ छोड़ गया
लेखा जोखा इतना ही याद बस रह जायेगा
कैसे बीता था सफ़र याद ये रह जाएगा |
मुश्किलों में डटे रहे या थक के हाल छोड़ दिया
फूल मिले खुश रहे या काँटों ने तोड़ दिया
कैसे काटा था समय याद ये रह जायेगा
कैसे बीता था सफ़र याद ये रह जायेगा |
रास्ते अनेक थे मंजिल को पाने के
तुमने राह नेक चुनी थी मुकाम पाने को
अलग राह जो चले थे उनसे बवाल किया
या बिना मलाल तुमने सबको स्वीकार किया
राह कटी कैसे थी याद ये रह जाएगा
कैसे बीता था सफ़र याद ये रह जाएगा
मंजिल तो हर कोई देखो एक ना एक दिन पायेगा |

~ इंदिरा 

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APNI JANG/अपनी जंग

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अपने अपने आंसुओं को आँख में ही थाम रखो
कौन समझेगा तेरे आंसुओं का मोल यहाँ
सब उठाये फिरते हैं अपने दुखों का सलीब
कौन साथ दे और मरहम लगाएगा यहाँ
जो साथ आये रोने वो कम ग़मगीन न थे
जो भी रोया साथ आपबीती पे रोयेगा यहाँ
जोश भर हिम्मत जगा अपनी जंग खुद ही लड़,
है सबकी अपनी अपनी जंग हौसला कौन देगा यहाँ
अपने दुखड़े सुना सुना दूसरों को पस्त न कर
कौन सुने तेरी सुनाने को सब बेताब यहाँ
करोड़ों हड़प के भी नहीं मिटती है भूख उनकी
कौन तय करेगा असली भिखामंगा है कौन यहा
~ indira

cat on the beech

सीपियाँ/Indira's Hindi blog

अपने अपने आंसुओं को आँख में ही थाम रखो
कौन समझेगा तेरे आंसुओं का मोल यहाँ
सब उठाये फिरते हैं अपने दुखों का सलीब
कौन साथ दे और मरहम लगाएगा यहाँ
जो साथ आये रोने वो कम ग़मगीन न थे
जो भी रोया साथ आपबीती पे रोयेगा यहाँ
जोश भर हिम्मत जगा अपनी जंग खुद ही लड़,
है सबकी अपनी अपनी जंग हौसला कौन देगा यहाँ
अपने दुखड़े सुना सुना दूसरों को पस्त न कर
कौन सुने तेरी सुनाने को सब बेताब यहाँ
करोड़ों हड़प के भी नहीं मिटती है भूख उनकी
कौन तय करेगा असली भिखामंगा है कौन यहाँcat on the beech

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Ho Na Ho- हो ना हो

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नज़रों से नज़रें मिलीं,
दिल ने दिल से बात की ‘
शब्द अर्थहीन लगें
हों ना हों |

दोनों ने एक दूजे को,
प्यार दिया, मान दिया
सौगातों की दरकार क्या ,
हों ना हों |
मन मिले, मिले विचार,
जिन्दगी से आत्मा,
तन की बिसात  क्या ,
हो ना हो |

दोस्ती जनम जनम की,
जिन्दगी भी जी ही लिए
मौत से अब डरना क्या ,
हो तो हो |

सीख

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किसी के आंसू पोंछ
किसी को दे हंसा
जीवन तो यही है
बाकी सब असार है
दुःख बाँट बढ़े नहीं
सुख बाँट घटे नहीं
जिन्दगी का फलसफा
बड़ा मजेदार है
बीत गया बात गयी
आगे को चलाचल
पीछे मुड़ देखना
एकदम बेकार है
जीवन एक लड़ाई है
खुद अपने आपसे
रोज़ एक नया है द्वन्द
यही तो संसार है
बंजारा घूम घूम

सीख है बटोरता
उन्हींसे  करता
अब ये व्यापर है
भाये तो खरीदलो
बदले में सीख देना
आज नगद और
कल उधार  है.
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